Monday, September 10, 2018

तुला पाहताना...

तुला पाहताना, तुला शोधिताना,
विसर ह्या जगाचा, पडे का मनाला...?

अशा धुंद राती, तुझी भेट होता,
थांबे हि वेळ, मला का कळेना...?

जो कधी उलगडे, आठवांचा पसारा,
तुझा गंध हा, छेडितो का मनाला...?

झालो जरी व्यक्त, काव्यातुनी ह्या,
तरीही तुझे गीत, रहाते उरी का...?
तरीही तुझे गीत, रहाते उरी का...?

Monday, March 12, 2018

रेखाएँ...

रेखाएँ कविता सी
बहे कोई धारा सी
जुडे़ जब दूसरी से
बने इक सागर सी...

रेखाएँ यें सावन सी
लगे मन-भावन सी
घुले जब रंगोमें
हो इंद्रधनु जैसी...

रेखाएँ यें दासताँ सी
अनकही कहानी सी
उतरें जब कागज़ पे
तब लगे रूहानी सी...

रेखाएँ यें तुज् जैसी
बेबाक और अल्लड सी
ले चले उस दुनिया में
लगती जो ख्वाबों सी...

ले चले उस दुनिया में
लगती जो ख्वाबों सी...

रेखाएँ कविता सी...