रेखाएँ कविता सी
बहे कोई धारा सी
जुडे़ जब दूसरी से
बने इक सागर सी...
रेखाएँ यें सावन सी
लगे मन-भावन सी
घुले जब रंगोमें
हो इंद्रधनु जैसी...
रेखाएँ यें दासताँ सी
अनकही कहानी सी
उतरें जब कागज़ पे
तब लगे रूहानी सी...
रेखाएँ यें तुज् जैसी
बेबाक और अल्लड सी
ले चले उस दुनिया में
लगती जो ख्वाबों सी...
ले चले उस दुनिया में
लगती जो ख्वाबों सी...
रेखाएँ कविता सी...