Tuesday, August 12, 2014

यारी...

यारी...

जब से है होश संभाला
तब से है एक बात जानी
यारों बिना
न जिंदगी सुहानी

जाने कब और कहा
कुछ पागल मिल गए
उन पागलो कि कतार में
साला हम भी शामिल हुए

अंजाने हाथ थामे
चल पडे हम
और साथ देते गए
कुछ अंजाने कदम

कदम से कदम मिलाना
इन्ही से सीखा
परिंदो की तरह उडना भी
इन्ही से सीखा

खुली आँखों से सपने देखना
इन्ही से सीखा
आँखे मूँदकर भरोसा करना भी
इन्ही से सीखा

जब दूर गए
तब इन्ही की याद आई
यादों के समंदर में तैरना
है इन्ही कि सिखाई

कुछ यादे, कुछ बाते
हमेशा याद रहते है
कुछ दोस्त, कुछ यार
हमेशा साथ रहते है

यही है...
मेरे यारों कि यारी
जिसने बनाई
मेरी जिंदगी सुहीनी...!!!